वेद वाणी 7-7-5
असादि वृतो वह्निराजगन्वानग्निर्ब्रह्मा नृषदने विधर्ता।
द्यौश्च यं पृथ्वी वावृधाते आ यं होता यजति विश्ववारम्॥ऋग्वेद ७-७-५॥
हमार जीवन रूपी रथ के सारथी परमात्मा बने। हम परमात्मा का वरण करते है। परमात्मा ने ही हमे धारण किया हुआ है। पृथ्वी से आकाश तक, परमात्मा का ही, वैभव प्रकट हो रहा है।
यज्ञ अर्थात् परहित के कार्य करने वालो को परमात्मा मिलते है।
God became the charioteer of our chariot of life. We choose the divine Lord. Only God has possessed us. From the earth to the sky, the glory of God is manifesting itself. Yagya means those who do charity work, they get God.