ड्रेगन अपने शिकार को जिन्दा निगल जाता है। अपने आपको ड्रेगन मानने वाले देश का ये ड्रेगन स्वभाव भारत के पड़ोसी देश भोग रहे है।
भारत की विदेश नीति का ड्रेगन को समर्थन ये परिणाम लाया है। *२०१४* मे राष्ट्र के भारत माता के वीर सपुत ऐक जुट हुए और राष्ट्र हितकर संचालन व्यवस्था सुनिश्चित की। ओर ये संचालन व्यवस्था भारत का सभ्यता दर्शन। धारदार विदेश निती से हमारे से दुर गये देश जीसको ड्रेगन निगल गया था। उसे ड्रेगन के पेट से बहार निकालने मे लगी हुई है।
इस भावना के अनुकुल श्रीलंकाई आर्थिक संकट मे भारत उसे मदद कर उभारने मे लगा है। ये प्रयत्न हमारे विदेश मंत्री ने संचालन व्यवस्था के आदेश अनुसार शुरु किया तो ड्रेगन देश के विदेश मंत्री को भारत आना पडा। ओर गलवान लद्दाख सीमा विवाद पर हमने हमारी बात ऐन एस ऐ के माध्यम से रखी। ओर *१९६२* की सीमा सुनिश्चित करने के लिए ड्रेगन पर दबाव बनाया। ओर वह सफल होता दिखाई दे रहा है।
युक्रेन रुस संकट के बीच भारत *शक्तिमान पितामह* की भुमिका मे आ गया है। भारत का अभिप्राय मायने रखता है। भारत के अभिप्राय को प्राप्त करने के मची विश्व दोड मे दिखाई दे रहा होगा।
आज से लागू होने वाले बजट मे पडोसी देश की मदद के लिए विशेष मुद्रा का आवंटन भारत कर चुका है।
युक्रेन रुस संकट मे भारत की भुमिका को मह्त्व विश्व दे रहा है।
राष्ट्र प्रेमी हो तो राष्ट्र की भुमिका का ये मह्त्व अवश्य समझेगा राष्ट्र के प्रति गौरव बढेगा।
हर कदम अपने पूर्वजो की कामना को पुर्ण करने के लिए आगे बढता भारत।
*ऐक भारत श्रेष्ठ भारत और अब सक्षम भारत।*
*भारत माता की जय।*
*वंदेमातरम्।*