साम को खुदा मिल गए बिच रास्ते में।
पूछ रहे थे, "कोन है तू ?!"
मैने जवाब में पूछा,"आपकी मां कोन है ?"
"में अजन्मा हुं। मेरी कोई मां नही होती। मेरी मौत भी नहीं।" उन्होंने बताया।
"में वो खुश नसीब हुं, जिसकी दो सबसे प्यारी मां है।
में वो खुश नसीब हुं, जो अपनी दर्शना मां से दार्शनिक कहलाता है।
मैं वो खुश नसीब हुं, जो दर्शना मां की सीख से देखता है।
मैं वो खुश नसीब हुं, जिसके नजरिए को दार्शनिक द्रष्टि कहा जाता है।
में वो खुश नसीब हुं, जिसे सखी मां का पहला बेटा होने 'श्री' होने का मौका मिला।
में वो खुश नसीब हुं, जिसे सखी मां दुलार से बिट्टू कहती है।
में वो खुश नसीब हुं, जिसे इन दोनो मां के दुलार को मेहसूस करने का मौका मिला।
में वो खुश नसीब हुं, जिसने सीख लिया की मां ही सबसे बड़ा भगवान है।" मेरा जवाब रहा।
दर्शना मां और सखी मां के चरणों में उनके इस बेटे का प्रणाम !
👣🙏🏼☺️
दुनियां की सारी प्यारी और अच्छी मां को उनके बच्चों की और से प्रणाम !
होलिका दहन की शुभकामनाए।