हाले दिल
क्या बताए तुम्हे हाले दिल
जो चाहा था मिल ना सका
फूल मुस्कान का खिल ना सका
क्यों मिली ये सजा दिल को
जो खता दिल कर ना सका
जो लगते थे अपने,
वो निकले परायो से भी दूर के
हाले दिल सुनाए अब किसको
क्या सारे जहा में कोई नहीं,
जो समझ सके अब मुझको।
सासे मिट नहीं पाती
यादे भुलाई नहीं जाती
मन में है इतना दर्द छुपा
फिर भी लब पर है हसी
आंखो की नमी छुपाए
केसे रहे हम खुशी खुशी।
✒️®Vएल©™