वेद वाणी 6-55-6
आजासः पूषणं रथे निशृम्भास्ते जनश्रियम्।
देवं वहन्तु विभ्रतः॥ऋग्वेद ६-५५-६॥
हे पूषादेव, हमारे यज्ञ अर्थात् परहित के कार्यो मे आप अपने वाहन के साथ पधारें एवं अपना वैभव प्रदान करें।
O Pushadev, come with your vehicle and bestow your splendor in our yajna i.e. for the works of charity.