बहुत बदल दिया है अब खुद को
जो पहले छोटे से घाव पे माँ के पास भागी चली जाती थी न
अब जब बुरी तरह से जख्मी हो जाती है न तो भी आह तक नहीं करती
संभाल लेती है खुद को खुद से
किसी और के पास जा के आँसु नहीं बहाती अंधेरे से डरने वाली
बस अब अँधेरा पसंद करती है
दर्द जब हद से पार हो जाए तो लिख दिया करती है जानती है वो,...पढ़ के भी कोई समझ नहीं सकता
पर जरा से सुकून की तलब मजबूर कर देती है लफ़्ज़ों को उकेरने पर❤️