0️⃣5️⃣0️⃣3️⃣2️⃣2️⃣पांच मार्च दो हज़ार बाइस । शनिवार । शुभ समय ।वसंत ऋतु । आज मुस्लिम मास "शब्बान" प्रारंभ ।
(१) इतिहास साक्षी है कि जिसकी बराबरी नहीं की जा सकती उसकी बदनामी शुरू कर दी जाती है ।
(२) "सब", सब के भाग्य में नहीं ।
(३) समय, मित्र और संबंध, ऐसी चीज हैं जो निशुल्क प्राप्त होती हैं मगर उनके मूल्य का ज्ञान इनके खोने पर ही होता है ।
(४) यह जरूरी नहीं कि सभी लोग आपको समझ सकें क्योंकि तराजू केवल भार बता सकती है क्वालिटी (स्तर) नहीं ।
(५) जन्म से मिले संबंध तो प्रकृति की देन है लेकिन स्वयं के सृजित संबंध आपकी पूंजी हैं, इन्हे सहेज कर रखिए ।
(६) सदैव परिवार से जुड़े रहें क्योंकि पत्ते मात्र वृक्ष पर सुरक्षित रहते हैं, वृक्ष से टूटे पत्ते उड़ जाते हैं ।
(७) कभी उन चीजों के बारे में न सोचें जो ईश्वर से प्रार्थना करने के पश्चात भी नहीं मिलीं अपितु उन असंख्य चीजों को भी देखें जो बिना प्रार्थना के ईश्वर ने हमें दी हैं ।
घर में रहें स्वस्थ रहें ।
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