*संजीवनी,पीड़ा,संवाद,सितार, कुटी, कुटीर
1 संजीवनी
भेज रहे संजीवनी, भारत की है शान ।
फँसे हुए यूक्रेन में, छात्र न हों हैरान।।
2 पीड़ा
जननी की पीड़ा बड़ी, पैदा किया सपूत।
कालांतर में फिर वही, डरवाते बन भूत ।।
3 संवाद
कैसे हो संवाद जब, टूट गई हो आस।
लड़ने पर आतुर दिखें,रहें पड़ोसी पास।।
4 सितार
झंकृत हुआ सितार जब, धरा झेड़ती तान।
मंद पवन बहला रही, छा जाती मुस्कान।।
5 कुटी
दिल में कुटी बनाइए, जहाँ विराजें राम।
दया प्रेम सद्भावना, बड़ा यही है धाम।।
6 कुटीर
लघु-कुटीर उद्योग हैं, उन्नति के सोपान।
काम मिले हर हाथ को, जीवन जीते शान।।
मनोज कुमार शुक्ल " मनोज "
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