"शिवालय"
तू क्यों ढूंढे उसे मंदिरों में
तेरे घर में ही तो शिव पार्वती रहते हैं।
जब भी जीवन में समुंद्रमंथन होता है,
दुख रूपी जहर तेरे घर के शिव पीकर
तुझे खुशियों का अमृत देते हैं,
तेरे घर में ही तो शिव रहते हैं।
तेरी सारी परेशानियां जो सहती है,
तुझ पर अपनी ममता का अमृत बरसाती हैं,
तुझे अपनी आंचल का छाव देती है,
तेरे घर में ही तो पार्वती रहती है।
तू क्यों ढूंढे उसे मंदिरों में,
तेरे घर में ही तो शिव पार्वती रहते हैं।
तू बनकर तो देख गणेश कार्तिके,
तेरा घर ही बन जाएगा शिवाला तेरे लिए।
हो जाएगा हर दिन शिवरात्रि और सावन तेरे लिए,
तू पूजा कर उस घर में रहते शिव पार्वती के लिए,
तुझे मिल जाएगा स्वर्ग उनके ही चरणों में,
तेरा घर ही बन जाएगा कैलाश हर जनम के लिए।
तू क्यों ढूंढे उसे मंदिरों में,
तेरे घर में ही तो शिव पार्वती रहते हैं।।
शिवरात्रि विशेष
"श्री"
- राजेश्री