युद्ध से युद्ध नहीं
बुद्ध से बुद्ध बनना चाहिए ।
धृणा से धृणा नहीं
स्नेह से स्नेह बनना चाहिए ।
हिंसा से हिंसा नहीं
अहिंसा से अहिंसा बनना चाहिए ।
कठोर से कठोर नहीं
नर्म से नर्म बनना चाहिए ।
विवाद से विवाद नहीं
हल से हल बनना चाहिए ।
स्वार्थ से स्वार्थ नहीं
निस्वार्थ से निस्वार्थ बनना चाहिए ।
क्रूरता से क्रूरता नहीं
करुण से करुण बनना चाहिए ।
लालश से लालश नहीं
लाभ से लाभ बनना चाहिए ।
सत्ता से सत्ता नहीं
सम्मान से सम्मान बनना चाहिए ।
छल से छल नहीं
निश्च्छल से निश्च्छल बनना चाहिए ।
पाप से पाप नहीं
निष्पाप से निष्पाप बनना चाहिए ।
घाव से घाव नहीं
उपचार से उपचार बनना चाहिए ।
प्रहार से प्रहार नहीं
परिवर्तन से परिवर्तन बनना चाहिए ।
विनाश से विनाश नहीं
सर्जन से सर्जन बनना चाहिए ।
हृदय से हृदय नहीं
भावना से भावना बनना चाहिए ।
भूख से भूख नहीं
भोजन से भोजन बनना चाहिए ।
असहाय से असहाय नहीं
आश्रित से आश्रित बनना चाहिए ।
मृत्यु से मृत्यु नहीं
प्राण से प्राण बनना चाहिए ।
मानव से मानव नहीं
मानवता से मानवता बनना चाहिए ।
-© शेखर खराड़ी
तिथि- २७/२/३०२२, फ़रवरी