नारी क्या है
रूप है तेज है।
शक्ति का भेष है।
दुर्गा है काली है। नारी मतवाली है।
विश्वास है विनाश है। दुनिया की आश है।
सौंदर्य है। धैर्य है।
देह है। विदेह है।
मां का स्नेह है।
नारी है कटारी है।
दुश्मनों के प्राण खीच ले वो काली है।
आज की ये नारी, है जवाब देती भारी है।
धरती हो या आसमान उसकी ही तो बारी है।
नारी है ये गर्व है ये शान ये जान भी हमारी है।
नारी है ये कल की तैयारी है।
आनंद त्रिपाठी।
लेखक।
#WomensDay