2️⃣6️⃣0️⃣2️⃣2️⃣2️⃣छब्बीस फरवरी दो हज़ार बाइस । शनिवार । शुभ समय । वसंत ऋतु । आज विजय एकादशी (सनातन) और स्वामी दयानंद जयंती है ।
(१) किरण चाहे दूरी की हो या आशा की, जीवन के सभी अंधकार मिटा देती है ।
(२) कामयाब होना हो तो एक बात गांठ बांध लो, पांव भले ही फिसल जाए लेकिन जुबान कभी नहीं फिसलनी चाहिए ।
(३) ज्यादा कुछ नहीं बदलता उम्र के साथ, बस बचपन की ज़िद समझौतों में बदल जाती है।
(४) हमारी आस्था की परीक्षा तब होती है जब हम चाहें तो वो न मिले और फिर भी हमारे दिल से शुक्रिया निकले !
(५) स्वीकार करने की हिम्मत और सुधार करने की नियत हो तो इंसान बहुत कुछ सीख सकता है ।
(६) उस पछतावे के साथ मत जागिए जिसे आप कल पूरा नहीं कर सकें अपितु उस संकल्प के साथ जागिये जिसे आपको आज पूरा करना है ।
(७) काम का आलस्य और पैसों का लालच, इंसान को कभी महान नहीं बनने देता ।
घर में रहें स्वस्थ रहें ।
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