क्या सब के सामने खुली किताब बने फिरते हो...
लोग आपकी बात समझते है
जस्बात नही..
लोग आपका मन पढ़ सकते है
मजबूरिया नही..
लोग अक्सर अपका हाल पूछेंगे
हालात नही...
हा, बेशक तकलीफ बाटनेसे कम होती है
पर खतम नही..
★इसलिए अपनी तकलीफे ने ईश्वर को सुना दिया करो★
क्योकि एक सच्चे दिल से निकली हुई पुकार या परेशानी जब उसके कानों में गूंजती है ना..
तब, ना वो आपको साथ देते है नाही कोई सलाह मश्वरा और नाही कोई जूठा दिलासा या उम्मीद
वो.. बस चुप चाप से आकर आपकी सारी परेशानियों को हल कर जाते है...