2️⃣5️⃣0️⃣2️⃣2️⃣2️⃣पच्चीस फरवरी दो हज़ार बाइस। शुक्रवार । शुभ समय । वसंत ऋतु ।
(१) हीरे को परखना है तो अंधेरे का इंतज़ार कीजिए धूप में तो कांच के टुकड़े भी चमकने लगते हैं ।
(२) ढूंढने पर वही मिलेंगे जो खो गए हैं वो कभी नहीं मिलेंगे जो बदल गए हैं ।
(३) जिस समय से हमारा मन अपने और दूसरों के लिए शुभ सोचना प्रारंभ कर देता है, शांति उसी समय हमारे जीवन में प्रविष्ट हो जाती है ।
(४) To be creative; is to be in love with life and mother nature.
(५) इज्ज़त सदैव इज्ज़तदार लोग ही करते हैं; जिनके पास ख़ुद इज्ज़त नहीं है वो किसी दूसरे को इज़्ज़त क्या देंगे !
(६) तेरे दुःख तेरे ही रहेंगे, चाहे तू इसे सुना या उसे सुना ।
(७) जीवन की वास्तविकता कभी नहीं बदल सकती क्योंकि समय हमें वहीं ले जाता है जहां हमारा जाना तय होता है ।
घर में रहें स्वस्थ रहें ।
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