2️⃣1️⃣0️⃣2️⃣2️⃣2️⃣इक्कीस फरवरी दो हज़ार बाइस । सोमवार । शुभ समय । वसंत ऋतु ।
(१) जन्म निश्चित है, मरण निश्चित है, अगर कर्म अच्छे हैं तो स्मरण निश्चित है ।
(२) मेहनत सीढियों की तरह होती है और भाग्य लिफ्ट की तरह, किसी समय लिफ्ट तो बंद हो सकती है लेकिन सीढियां सदैव ऊंचाई की तरफ ले जाती हैं ।
(३) झूठे इंसान की ऊंची आवाज़ सच्चे इंसान को ख़ामोश करा देती है लेकिन सच्चे इंसान की ख़ामोशी झूठे इंसान की बुनियाद हिला देती है ।
(४) समय और भाग्य, दोनों ही परिवर्तनशील हैं, इन पर किसी को अहंकार नहीं करना चाहिए ।
(५) वक्त से हारा या जीता नहीं अपितु सीखा जाता है ।
(६) "अकड़" शब्द में कोई मात्रा नहीं होती लेकिन यह अलग अलग मात्रा में प्रत्येक जीव में मौजूद होती है ।
(७) डाली से गिरते हुए पत्तों ने क्या ख़ूब कहा है कि अगर बोझ बन जाओगे तो अपने ही तुम्हे गिरा देंगे ।
घर में रहें स्वस्थ रहें ।
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