सारे रिश्ते टूटे तोड़ दिए तुमनें बंधन।
मस्तक पर ठंडक का लेप करना चंदन।।
साँसे है जब तक तो चलता रहूँगा।
जिस दिन रुकी उस दिन सूरज से ढल जाऊंगा।।
उम्मीदों पर पानी तो सनम ने फेरा है।
हमने वही किया जो कहा मुँह सनम ने फेरा है।।
घुटेंगे ओर मर जायेंगे।
फिर खोजते रहना हम लौटकर नही आयेंगे।।
-!~कृष्णा~!