#खुटियादेव (सीहोर जिले की एक सत्यघटना)
सीहोर के पास एक गांव धबोटी में एक मंदिर और उसकी प्रथा को लेकर एक हमे डॉक्यूमेंट्री बनानी थी। शनिवार को हम इस काम के लिए निकले। सबसे पहले तो सीहोर कलेक्टर की परमिशन लेनी थी इस काम के लिए। उनसे जरूरी खानापूर्ति करके हमलोगों ने धबोटी गांव मंदिर के आसपास कैमरे फिक्स किये और शूट किया। वहां के लोगो के छोटे छोटे इंटरव्यू भी लिए इस प्रथा को लेकर। सभी ने लगभग एक ही बात बोली।
लोगों के मुंह से #खुटियादेव नाम सुनसुनकर हमारे मन मे भी इस बारे में जानने की उत्सुकता हुई। जब हमने वहां लोगो से पूछा तो पता पड़ा कि वहां की एक प्रथा है। दीवाली बाद सभी लोग खुटियादेव की पूजा कर उसके बाद एक विशेष किस्म के पौधे को उखाड़ने का प्रयत्न करते हैं। ऐसा माना जाता था जो भी उस पौधे को उखाड़ देगा उसे खुटियादेव का आशीर्वाद मिलता है। और वो बहुत भाग्यशाली होता है। पर आजतक कोई उस पोधे को उखाड़ने में सफल नही हुआ। 3-4 लोग मिलकर भी नही उखाड़ पाते। मेरे लिए ये जानना बड़ा रोचक विषय था।
लेकिन हमारे साथ आये एक साथी प्रवीण भाई इन सब बातों को नही मानते हैं। उन्होंने कुछ टीका टिप्पणी कर दी उस प्रथा को लेकर। खोखला अंधविश्वास बताया। फिर हमलोगों में उसे समझाकर चुप करा दिया। हमारी टीम सर्किट हाउस में रुकी थी।
रात को खाना वगेरह खा पी कर हमलोग उस डॉक्यूमेंट्री के सम्बंध के बातें करने लगे। रात को लाइट नही रहना उस टाइम आम बात हुआ करती थी। चिमनी की रोशनी में बिस्तर पर लेटे लेटे बातें करते हुए पता नही कब हमारी नींद लग गई।
आधी रात के बाद प्रवीण भाई को लगा कि कोई उसकी छाती पर कोई बैठ गया है। और उसके दाहिनी जांघ में तेजी से किसी ने काट लिया हो दूसरी तरफ सीने पर भी काफी बोझ महसूस होने के कारण उसे घुटन सी होने लगी थी। कुछ देर तक वह कुछ समझ ही नहीं पाया कमरे में चिमनी भी बुझी होने से घुप्प अन्धेरे की वजह से वह जोर से चिल्ला पड़ा इसके कारण हम सबकी नींद खुली और घुप्प अन्धेरे में मोबाइल की लाइट जलाकर देखा छोटा प्रवीण घबराया हुआ बिस्तर पर बैठा हुआ है । उसने डरते सहमते सारी बात बताई और हमे जांघ में काटने और तेज चुभन की बात भी कही हमने तुरन्त जांघ को देखा तो वहाँ पर जैसे किसी ने दांत गडा़कर काट लिया हो ऐसा स्पष्ट दिखाई दिया । हमारे साथी और हम सब घबराए हुए वहीं आसपास फर्श पर कहीं कोई जहरीले कीड़े को तलाशते रहे जो शायद काटकर कहीं छुपा हो पर हमारी तलाश बेकार रही । दवाई वगेरह तो थी नही।खोपरे के तेल का पाउच फाड़ा और वो लगा दिया उसपर। इसके बाद सभी वापिस सो गए। कुछ देर बाद प्रवीण फिर जोर से चिल्लाया।हमलोग फिर घबरा के उठ गए। उसने फिर वही बात कही की उसे ऐसा लगा कोई उसकी छाती पर बैठा हुआ था।वो काफी डर गया। जैसे तैसे हमलोगों ने रात गुज़ारी।