आदि गुरु शंकराचार्य जी कहते हैं कि केवल ब्रह्म सत्य है और जगत मिथ्या है। यह जो मिथ्या को सत्य दिखाता है, वही अविद्या है.... केवल अहं ब्रह्मास्मि कह देने से आत्मा ब्रह्म नहीं हो जाती... ‘विवेक चूड़ामणि’ में गुरु शंकराचार्य जी कहते हैं कि सिर्फ ‘मैं राजा हूं’ रटने से कोई राजा नहीं बन जाता। राजा बनने के लिए शत्रु का नाश करना पड़ता है। यहां शत्रु से अर्थ अविद्या से है। उपनिषद ज्ञान अध्ययन ‘बुद्धि का व्यायाम’ है।