1️⃣4️⃣0️⃣2️⃣2️⃣2️⃣चौदह फरवरी दो हज़ार बाइस । सोमवार । शुभ समय । शिशिर ऋतु ।
(१) इंसान ही इंसान की दवा है कोई दुःख देता है तो कोई सुकून बन जाता है ।
(२) जिसे निभा न सको,ऐसा वादा मत करो, बातें अपनी हद से ज्यादा न करो ।
(३) ये जो मुस्कराहट का लिबास पहना है मैने, दर असल खामोशियों को रफू करवाया है मैंने ।
(४) ख्वाहिशों ने भटकाए हैं जिंदगी के रास्ते, वरना रूह तो उतरी थी ज़मीन पर मंज़िल का पता लेकर
(५)स्वयं को पढ़ना दुनिया का सबसे कठिन कार्य है, प्रयास अवश्य करें ।
(६) शौक ही नहीं रहा अब कि मैं ख़ुद को साबित करूं, आप समझ लें, बस वही हूं मैं ।
(७) लक्ष्य अगर सर्वोपरि है तो फिर सराहना, आलोचना और विवेचना कोई मायने नहीं रखते।
घर में रहें स्वस्थ रहें
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