#1_मैं_हूँ_ना
मैं गलत हूँ माना और तुम सही हो
मैं नहीं बदला क्या तुम भी वही हो?
मैं भटक रहा हूँ तुम भी खोयी हो
मैं बेचैन हूँ क्या तुम चैन से सोयी हो?
मैं सुफी शायर हूँ तुम सादगी से सजी हो
मै बीता हुआ कल हूँ तुम आनेवाली सदी हो।
मैं अधीर पल हूँ तुम राहत कि घड़ी हो
मैं टूट रहा हूँ क्या तुम आखरी कड़ी हो?
मैं थका हारा मुसाफ़िर हूँ तुम मेरी मंजिल हो
मैं तेरे ईश्क का मुजरिम क्या तुम ही मेरे वकील हो?
मैं खामोश हूँ तुम मेरे अंदर कि चीख़ हो
मैं! खैर छोड़ो बताओं क्या तुम ठीक हो?
मैं उतना उलझा नहीं जितना तुम मुझे समझती हो
मैं खुली क़िताब हूँ तुम कहां तक पढ़ी लिखी हो?
मैं जैसे किशन सा और तुम राधे सी लगती हो
मैं हूँ ना! फिर तुम किस बात से डरती हो?
#Shayri
#1stpost
#Latenight