वेद वाणी 6-48-2
ऊर्जो नपातं स हिनायमस्मयुर्दाशेम हव्यदातये।
भुवद् वाजेष्वविता भुवद्वृध उत त्राता तनूनाम्।।
॥ऋग्वेद ६-४८-२ ॥
सबके हितकारी, हमारी सन्तान की तथा हम सब की रक्षा करने वाले,उर्जा से सदैव ओत-प्रोत ईश्वर का हम वन्दन करते है। हम अपना सर्वस्व ईश्वर को अर्पण करते है।