जिंदगी आ तुझे हम गले लगाएँ
कुछ पल हँसे कुछ पल मुस्कराएँ
बिखर जाये ये बेगाने गम के साये
न सोचें कभी क्या पाये क्या खोये
बेगानी बस्ती में कितनी दूर जाये ?
अपनों के दिये गम को भूल जाये
टूट हुआ दिल कुछ तो राहत पाये
ऐसा पल फिर शायद हम न पाये
✍️ कमल भंसाली
-Kamal Bhansali