हर ढलती हुई शाम में बस तेरा इंतजार है,
कैसे बतादू उब हर
चलती हुई सास में तेरा नाम है,
ना दिखता उजालो सा दिन है और ना रात का अहसास है,
ना सिकवा किसी से ना
गम का अहसास है,
बस अब हर ढलती हुई शाम में तेरा इतज़ार है,
खूब हुई आशु ओकी
धार है,
आशु के साथ बेहका मेरा बेशुमार प्यार का अहसास है,
मेरी आखों मे तुझे पाने का ख़्वाब हर दिन बेशुमार है,
ढलते हुवे दिन के साथ तेरा अहसास लाजाब है,
बस अब हर ढलती हुई शाम मे मुझे तेरा इंतजार है!....
-Chavda Payal