पहरन धोती, लिए लाठी, सावले रंगसे रंगा था,
मां भारती की लाज रखने, एक गांधी ऐसा जन्मा था,
सत्य, अहिंसा, प्रेम, करुणा का, अलख घर घर में जगाया था,
विविद्धता में एकता का अखंड विचार जगाया था,
एक कपड़े में दांडी करके, नमक का कर्ज चुकाया था,
जब थप्पड़ पड़े एक गाल पर तो, उसने दूसरा आगे करना सिखाया था,
जब गाली दे कोई तो उसने, हंसना जरुर सिखाया था,
अस्पृश्यता और जातिवाद जैसे, दुष्ट रोगों को हराया था,
बापु कहकर सबने नवाजा, वो राष्ट्रपिता कहलाया था,
आज रहता जो हर बटवे में है, तब वो गोली से मराया था,
मां भारती की लाज बचाने एक गांधी ऐसा आया था,
एक गांधी ऐसा आया था, एक गांधी ऐसा आया था।
B+ve