इन दिनों मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मैं बिल्कुल क्षणभंगुर वस्तु के समान हो गया हूं.. कभी-कभी तो अजीब सा मन हो जाता है.. सच बताऊं तो इन दिनों कुछ भी करने का दिल नही कर रहा है.. वैसे लाखों काम पड़े है मेरे इर्दगिर्द परन्तु सारे काम को कल पर टालने की अब आदत सी हो गयी है..।।