मैं और मेरे अह्सास
प्रीत की रीत निभा लेना l
उम्रभर एसे ही साथ देना ll
जाने की बात की और l
भीग गये क्यूँ मेरे नैना ll
एक ही दिन न मिले तो l
काटे नहीं कटती रैना ll
जरा सी बात दिल पे ली l
उदास सी रहती है मेना ll
बह ने को तैयार होती है l
सदा आंसूओ की सेना ll
१७-१-२०२२ सखी
दर्शिता बाबूभाई शाह