-ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़ की तरफ से सभी देशवासियों को मकर संक्रांति पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई
Makar Sankranti 2022: मकर संक्रांति २०२२:
👉अलग अलग जगहों
के अक्षांश-रेखांश के अनुसार सूर्योदय के परिणामस्वरूप
सूर्य के राशि परिवर्तन में समयांतर हो जाता है। इस बार यही भ्रम रहेगा कि संक्रांति 14 या 15 जनवरी को मनाया
जाए। वाराणसी के पंचांगों के साथ-साथ देश के अन्य भागों के अधिकतर पंचांगों में सूर्य का राशि परिवर्तन 14 जनवरी की रात्रि 08 बजे के बाद दिखा रहा है अतः वाराणसी के पंचांग के अनुसार संक्रांति पर्व निर्विवाद रूप से 15 जनवरी को ही मनाया जाएगा। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ
ही सभी तरह के मांगलिक कार्य जैसे यज्ञोपवीत, मुंडन,
शादी-विवाह, गृहप्रवेश आदि आरम्भ हो जाएंगे। सूर्य की
दक्षिणायन यात्रा के समय जो देवप्राण शक्तिहीन हो गये थे
उनमें पुनः नई ऊर्जा शक्ति का संचार हो जाएगा और वे
अपने भक्तों-साधकों को यथोचित फल देने में सामर्थ्यवान
हो जाएंगे।
,मकर संक्रांति पर स्नान-दान
इस पर्व पर समुद्र में स्नान के साथ-साथ गंगा, यमुना,
सरस्वती, नमर्दा, कृष्णा, कावेरी आदि सभी पवित्र नदियों
में स्नान करके सूर्य को अर्घ्य देने से पापों का नाश तो होता
ही है पितृ भी तृप्त होकर अपने परिवार को आशीर्वाद देते
हैं यहां तक कि इस दिन किए जाने वाले दान को महादान
की श्रेणी में रखा गया है। वैसे तो सभी संक्रांतियों के समय
जप-तप तथा दान-पुण्य का विशेष महत्व है किन्तु मेष और
मकर संक्रांति के समय इसका फल सर्वाधिक प्रभावशाली
कहा गया है उसका कारण यह है कि मेष संक्रांति देवताओं
का अभिजित मुहूर्त होता है और मकर संक्रांति देवताओं के
दिन का शुभारंभ होता है। इस दिन सभी देवता भगवान
श्री विष्णु और मां श्रीमहालक्ष्मी का पूजन-अर्चन करके
अपने दिन की शुरुआत करते हैं
इसीलिए साधक यहां कल्पवास भी करते हैं।
-भगवान श्री सूर्य देव की स्तुति करके उनको प्रसन्न करके आज के दिन उनके साधक बनकर आप कामयाबी की मंजिल को पा सकते हैं ब्रह्मदत्त
शिव द्वारा सूर्य की महिमा का वर्णन
मरणोपरांत जीव की गति बताने वाले महानग्रंथ
'कर्मविपाक' संहिता में सूर्य महिमा का वर्णन करते हुए
भगवान शिव माँ पार्वती से कहते हैं कि देवि ! ब्रह्मा विष्णुः
शिवः शक्तिः देव देवो मुनीश्वरा, ध्यायन्ति भास्करं देवं
शाक्षीभूतं जगत्त्रये। अर्थात- ब्रह्मा, विष्णु, शिव, शक्ति,
देवता, योगी ऋषि-मुनि आदि तीनों लोकों के शाक्षीभूत
भगवान् सूर्य का ही ध्यान करते हैं। जो मनुष्य प्रातःकाल
स्नान करके सूर्य को अर्घ्य देता है उसे किसी भी प्रकार का
ग्रहदोष नहीं लगता क्योंकि इनकी सहस्रों किरणों में से
प्रमुख सातों किरणें सुषुम्णा, हरिकेश, विश्वकर्मा, सूर्य,
रश्मि, विष्णु और सर्वबंधु, जिनका रंग बैगनी, नीला,
आसमानी, हरा, पीला, नारंगी और लाल है। हमारे शरीर को
नयी उर्जा और आत्मबल प्रदान करते हुए हमारे पापों का
शमन कर देती हैं प्रातःकालीन लाल सूर्य का दर्शन करते
हुए 'ॐ सूर्यदेव महाभाग ! त्र्यलोक्य तिमिरापः। मम्
पूर्वकृतं पापं क्षम्यतां परमेश्वरः। यह मंत्र बोलते हुए सूर्य
नमस्कार करने से जीव को पूर्वजन्म में किये हुए पापों से
मुक्ति मिलती है।
🙏🙏➖ प्रस्तुतकर्ता ➖ ब्रह्मदत्त त्यागी हापुड़