स्कूल के दिन तू वापस आजा।
फिर से जल्दी उठना और सुबह की चिड़ियों की चिक चिकाहट तू सुनाजा।
स्कूल तेरी गंदी सी मेली सी ड्रेस माँ तू अपने हांथो से पहना जा।
वो सुबह से हाथ जोड़के दो मिनिट आंखों को बंद करना और पहले पीरियड
का डर स्कूल तू करा जा।
स्कूल तेरे एक 15 मिनिट ब्रेक के लिये घण्टो से इंतजार कराना तेरी यह
अदा दिल को भांति थी।
वो गेम्स वाले पीरियड के दिन स्कूल जरूर जाना और स्कूल तेरे यहां वो
वॉसरूम जाना तो एक हमेशा से भाना था हमे जो वॉसरूम जा के अपना
भाई चारा बढ़ाना स्कूल के दिन तू वापस आजा।
अपने जिगरी यार के साथ बैठनके के चक्कर मे हर कोई से लड़ जाना।
स्कूल तेरी लास्ट बेंच पर लिखना हमारे यारों के लिये तो एक लव लेटर ही
था।
स्कूल तेरे यहां बैठके टिफिन खाना किसी फाइव स्टार होटल से कम थोड़ी
था।
स्कूल तेरे यहां ही मिले थे वो अनजान लोग आज जो जान बन गये।
स्कूल तू किसी मंदिर से कम कैसे हो सकता माँ के बाद तेरे यहां ही बीता
सारा बचपना स्कूल के दिन तू वापस आजा।
स्कूल तेरी ड्रेस ने ही सिखिया था वो अनुशासन का पहला पन्ना और तू ने
ही सिखिया पेन्सिल से पैन पकड़ना।
स्कूल तेरे यहां ही मिले थे वो ज्योतिष जो बिना हाथ देखे बता दिया करते
थे हम दोस्तों का भविष्य। स्कूल के दिन तू जल्दी वापस आजा।
PRASHANT SONI