राष्ट्रीय एकता दिवस ( सरदार वल्लभ भाई पटेल जी)
पिरोया है जिस धागे ने
तारीफो के पुल अनेक
मोती ही तो दिखती सबको
पर धागा है यहाँ नेक
बात जब आयी यहाँ सरदार भाई की
ज्योत थे बिस्मार्क वो अखंड देश की
साम दाम दंड भेद के सब राह चल दिये
कौटिल्य जैसी नीति से भारत अमर किये
कूट नीति त्याग और निष्ठा लिए हुए
बिखरी रियासतों को लोह ने संजो लिए
आवाज़ गर्म से भरा, मिज़ाज़ मर्म था
प्रचंड कर्मरथ पे चल भारत बना दिया
शस्त्र से डरा रखा , पर न शस्त्र उठाया
कूटनीति से ही तो दुश्मन को हराया
क्रोध बस आखों में था, मोह का ज़मीर था
दृढ़ मार्ग पर खड़ा मिले ऐसा फ़क़ीर था