Hindi Quote in Poem by અધિવક્તા.જીતેન્દ્ર જોષી Adv. Jitendra Joshi

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अमृता प्रीतम
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एक मुलाक़ात .... खुदा के साथ ....

एक दिन मिल गया खुदा मुझ को,
मैंने पूछा ये क्या हुआ तुझ को,

क्यों मेरे हौंसले बढ़ाता है ,
रोज़ सपने नए दिखाता है,

और फिर उन को तोड़ देता है ,
ला के रस्ते पे छोड़ देता है,

कई रिश्ते बने जो फिर टूटे,
कितने ही दोस्त राह में छूटे,

दे के सुख हाथ खींच लेता है ,
कर दुखी आँख मीच लेता है,

क्यों नहीं मेरा कुछ ख्याल तुझे ,
कुछ पता भी है मेरा हाल तुझे ....

हँस के बोला के क्यों बिगड़ती हो ,
मिल गया हूँ तो अब क्यों लड़ती हो ,

ख़ुशी थी तब ना किया मुझ को याद ,
ग़म में करने लगी हो तुम फ़रियाद .

इसको तकलीफ अपनी कहती हो ,
ये तो कुछ भी नहीं जो सहती हो,

ज़िन्दगी के कठिन ये रस्ते हैं ,
यहाँ सुख हैं तो दुःख भी बसते हैं,

जो भी इन पर से गुज़र जाता है,
अपनी मंज़िल को वो ही पाता है ...

परेशानी तो इक बहाना था ,
तुझ को अपने करीब लाना था ,

हर एक इंसान को परखना है ,,
मुझ को सब का ख़याल रखना है

सब के दुःख दर्द मैं भी सहता हूँ ,
मैं तुम्हारे भी दिल में रहता हूँ ....

कभी मुझ से जो मिलना चाहोगी,
किसी रोते को गर हँसाओगी ,

कभी छोड़ूंगा ना मैं साथ तेरा ,
तेरे सर पे रहेगा हाथ मेरा ....

----- अमृता प्रीतम जी -----

Hindi Poem by અધિવક્તા.જીતેન્દ્ર જોષી Adv. Jitendra Joshi : 111710883
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