आओ मेरे देश प्रभु
भारतवासी आज पीड़ित है, कान्हा,
पुकार रहे हैं तुम्हें, हे कान्हा
मेरे देश में अपना प्रगट रूप दिखाना।
बाहर छाया है सन्नाटा घना
राधा के नयनों से आँसु बरसे
हर श्वास को सुदामा तरसे
सुन ले दिल की पुकार, हे कान्हा
मेरे घर तुम जल्द से आना।
गीता के वचन को है निभाना,
महामारी के युद्ध में रथ चलाना,
सुदर्शन का चमत्कार दिखाना,
Corona के सर्वनाश से बचाना।
प्रभु अपना विराट स्वरूप दिखाना
मेरे देश प्रभु तुम जल्द से आना।
केशव प्रभु बोले:
हे वत्स!
सुन ली है तेरी पुकार।
मैं तो सदा हूँ साकार।
कलियुग में भूल गए मगर,
सत्य के पथ से गए हो डगर,
बह रहे हो माया के सागर।
वसुधैव कुटुम्बकम् अगर
तो कैसा भेद भाव और नफ़रत?
वाह! देते हो मुझे भी रिश्वत?
गीता और क़ुरान को समझकर
खोज मुझे दिल में झांककर,
पाओगे मुझे तुम प्रकृति में
और मेरा रूप हर इंसान में।
दिलख़ुश पंजवानी
टोरोंटो, कनाडा
११-५-२०२१