यदि ईश्वर न हो तो,
समस्या बढ़ जायेगी
विषाद अनियंत्रित हो जायेगा
उदासी घिर आयेगी।
क्या करें क्या न करें
उसकी भूमिका अहं होती है,
वह जागता है या सोता है
पता नहीं
अच्छा और बुरा होता है।
हम बहस करते हैं
पूजा करते -करते
उसका होने का अनुमान जताते हैं।
यदि ईश्वर न हो तो
इतिहास छोटा हो जायेगा
वर्तमान गूंगा सा लगेगा
भविष्य की इच्छा कम हो जायेगी,
प्यार को क्षितिज नहीं मिलेगा
दौड़ पर विराम नहीं लगेगा
जीवन में दया नहीं दिखेगी ।
ईश्वर नहीं होगा तो
देशों का भूगोल बदल जायेगा,
मन सबका संक्षिप्त बनेगा।
* महेश रौतेला
२६.०४.२०१५