*कार्यार्थी भजते लोकं*
*यावत्कार्य न सिद्धति l*
*उत्तीर्णे च परे पारे*
*नौकायां किं प्रयोजनम् ll*
भावार्थ -- *जिस तरह नदी पार करने के बाद लोग नाव को भूल जाते हैं ठीक उसी तरह से लोग अपने काम पूरा होने तक दूसरों की प्रसंशा करते हैं और काम पूरा हो जाने के बाद दूसरे व्यक्ति को भूल जाते हैं।*
।। जय सियाराम जी ।।