बहुत कुछ कहना चाहते हैं
बहुत कुछ सुनना चाहते हैं
लेकिन ज़िन्दगी मौका ही नहीं देती
जब बोलना चाहे तो ज़ुबान सिल जाती है
कमबख्त ज़िंदगी का सच में कोई भरोसा नहीं
जब वक्त होता है तो कुछ बोल नहीं पाते और
जब बोलना चाहे तो वक्त नहीं होता
कुछ की मजबूरियां हैं तो कुछ की गलतफहमियां
लेकिन ज़िन्दगी भी कुछ कम नहीं है,
जी भर कर इम्तिहान लेती है
बात ये भी सच है कि ज़िन्दगी का दूसरा नाम ही इम्तिहान है...
तन्हा... कुछ लोगों ने किया, कुछ ज़िंदगी ने और कुछ हम खुद ही हो गये और थोड़ा थोड़ा करते बिल्कुल ही हो गये...
ज़िंदगी को जैसे अपनाएंगे वो वैसी ही होगी
हमने मज़ाक में लिया और वो मज़ाक बन कर ही रह गई
कुछ तो बिन बुलाए मेहमान की तरह अपने आप ऐसे ही आते हैं कि जाने का नाम नहीं लेते
और कुछ.......................................!
सच में मज़ाक है!
है ना...!