डर
अरे यह क्या हो गया है, चारों तरफ डर का माहौल छा गया है
हर कोई मानो, डर डर के जी रहा है; या तिल तिल मर रहा है
यह मौत का भयानक काला साया, पूरी दुनिया में छाया हुआ है
वक्त कब, कैसे, क्या लाएगा यह सोच के मन गभरा जाता है
चारों और बेकारी छाई हुई है, बेचारा गरीब भूखा मर रहा है
बुज़ुर्ग अकेले पड़ गए हैं, न साथी, न महफ़िल, सन्नाटा छाया है
बच्चोंका तो बच्चपन छीनसा गया है, न क्रिकेट, न फुटबॉल, सब थंबसा गया है ।
एक छोटेसे कीटाणुने, सारी दुनियाको, हिला कर रख दि है
हे परमात्मा कर दया हमपर, हटा दे मौत का यह काला साया
Armin Dutia Motashaw