इश्क है तो इश्क सरे अंजाम होना चाहिए
नही तो ये सारा जहां वीरान होना चाहिए
उससे कहो कि आकर मुझसे माफ़ी मांगे
नहीं तो ये सर कलम सरे बाजार होना चाहिए
अब इश्क़ में माफ़ी नहीं होनी चाहिए
अगर हो गुस्ताखी तो फिर फांसी होनी चाहिए
किया है मैंने गुनाह इश्क़ करने का तुमसे
तो मेरी सजा भी अच्छी खासी होनी चाहिए
दिल की जगह खुदा को खिलौना बनाना चाहिए
और उस खिलौने में एक चाभी लगाना चाहिए
जो चले आते हैं यूं ही दिल के अंदर तक
अब उन्हें भी हमसे पुंछने का हक़ अदा की जानी चाहिए