शिष्य पूजै गुरु आपना, गुरु पूजे सब साध।
कहैं कबीर गुरु शीष को, मत है अगम अगाध।।1।।
शिष्य अपने गुरु की श्रद्धापूर्वक वंदना करता है और गुरु स्नेह सहित सभी साधओं की वंदना करते हैं। कबीरजी कहते है कि गुरु-शिष्य का संबंध रतना गहन और गंभीर है कि सर्व-साधारण की समझ में नहीं आ सकता। दोनों ही अपने अपने कर्तव्य पर आरुढ़ हैं।
सत साहेब जी
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