पूछा मैंने आइने से,
बता कैसी लगती हुँ?
निहार कर कूछ देर बोला...
मस्तिष्क पर रेखाएं नजर आ रही हैं, पर इनमें फ़िक्र अपनों की हैं।
आँखों में काजल सजी नहीं, नीचे डार्क सर्कल हैं,
अपनो के लिये तू ठीक से सोई नहीं हैं।
कानों में पहनी बाली नहीं, पर अनकहा सुनने का हुनर आ गया हैं।
होंठों पे सजी लाली नहीं,
पर तेरे बोल मे प्यार झलकता हैं।
नाखून टूटे बेरंग हैं,
पर हाथों मे स्वाद आगया हैं।
तोंद थोड़ी सी बाहर आगई हैं,
यह खुद को समय ना देने का नतीजा हैं।
कमर तेरी कमसीन ना सही,
तूने झुकना सिख लिया हैं।
घुटनों में थोड़ा दर्द हैं,
पर घर में, दौड़ तेरी मेराथनों वाली हैं।
तू कल भी खूबसूरत थी, आज भी हैं....
कल तू चंचल राधा थी, आज लक्ष्मी हो गई हैं।
Dedicated to all ladies.💖