तिरंगा.....हमारी शान
एक बार फिर से
गणतंत्र दिवस ये आया है
एक बार फिर शान से
ये तिरंगा अपना लहराया है।
हम रहें या ना रहें
तिरंगा ये सदा रहेगा
बस यही एक सपना
हम सबने आँखों में सजाया है
एक बार फिर शान से
ये तिरंगा अपना लहराया है।
गौरवशाली दिन है आज का
एक सुनहरा इतिहास है
संविधान का निर्माण हुआ
सच्ची आजादी का ये एहसास है
समानता और धर्मनिरपेक्षता को
मिला यहाँ अधिकार है
इसके हर एक पन्ने में
सच्चाई और सदाचार है
गणतंत्र की सच्ची परिभाषा
संविधान ने समझाया है
एक बार फिर शान से
ये तिरंगा अपना लहराया है।
कई सर कटे, कई घर बँटे
कितनों ने जान गँवाई है
जाने क्या क्या खोया हमने
तब कहीं ये आजादी पाई है
जाने कितनी माँ - बहनों ने
शहीदों के नाम पर रोया है
जाने कितने लाचार पिता ने
घर के चिराग को खोया है
उन वीर शहीदों ने हवाओं से
अपना पैगाम भिजवाया है
शान ना इसकी कम होने पाए
जिसके लिये सबकुछ गँवाया है।
आज एक बार फिर शान से
तिरंगा अपना लहराया है।
सूरज की नयी किरण
लायी है नया सवेरा
एक बार फिर से होगा
सोने की चिड़िया का बसेरा
अँधकार अब थमने को है
खुशहाली का मौसम आया है
खत्म करें हम गलत विचार
जो किसी के मन में आया है।
अपने तिरंगे का स्वागत करने
देखो त्रतुराज बसंत भी आया है।
देखो एक बार फिर शान से
तिरंगा अपना लहराया है।
अनिता पाठक
25/01/2020