मेरे इनकार को भी तुम कभी इकरार समझ लेना।
मैं तुमसे कुछ न कहूँ तो फिर भी यार समझ लेना ।
कभी दूर रहा मैं अगर और तुम्हें गले न लगा पाऊँ।
बेकरारी में याद करना औऱ इंतज़ार समझ लेना।
गलतियों को सिरे से खारिज़ कर माफ कर देना।
बस कभी कभी थोड़ा थोड़ा सा प्यार समझ लेना।
अगर गुस्सा मैं हो जाऊं औऱ कुछ न कहूँ मुँह से।
खामोशी को भी कभी कभी हथियार समझ लेना।
यूँ तो बहुत आये औऱ गए उस रास्ते से "अर्जुन" ।
हाथ थाम लूँ तुम्हारा तो इख्तियार समझ लेना।