पुण्य पथ है
पुण्य पथिक है,
महिमा धरा की पुष्प कमल है।
नभ को देखा
खोया गाँव है,
मन के आगे बड़ा परिवर्तन है।
घर के आगे
दुख बैठा है,
वन्दन में सब खुला हुआ है।
शुद्ध आशा में
विशुद्ध समय है,
जीवन ये अनुपम रहस्य है।
दुनिया में झांका
भीड़ बहुत है,
इस भीड़ में अतिथि नहीं है।
हर पथ पर
आलोक मिला है,
हर पथ का लक्ष्य अमिट है।
**महेश रौतेला