©"अपनी हिन्दी…
हमारी हिन्दी…"
डॉ.अमित कुमार दवे
1
राजनीति से हारी
फिर भी….
भारत की प्यारी,
जग में दुलारी..
मेरी हिन्दी..,
अपनी हिन्दी…,
हमारी हिन्दी...।
2
ज्ञान संवाहिनी..
संभाषण प्रदायिनी..
नेह सर्व वर्षिणी..
जगाह्लादकारिणी..
मेरी हिन्दी…
हमारी हिन्दी..।
3
सर्वकामप्रदायिनी,
रत्नसंप्रचारिणी,
मनोविनोदकारिणी,
राष्ट्रैक्यसूत्रिणी
अपनी हिन्दी…,
हमारी हिन्दी…,
मेरी हिन्दी..।
4
जगत् मान्य..
जन स्वीकार्य..,
राष्ट्र गौरव..,
सम्पर्क आधार,
पर...क्यूँ ..
पद से वञ्चित..
मेरी हिन्दी..,
अपनी हिन्दी..,
हमारी हिन्दी..
देश की हिन्दी..
जग की हिन्दी…?
5
रखती क्रोढ़ में..
कोश महान्..,
शब्दार्थ महान्..
साहित्य-लालित्य..
गौरव-गाथां महान्..,
देश की हिन्दी..
मेरी हिन्दी..,
हमारी हिन्दी..,
जग की हिन्दी..,
6
घर में ही ….
वञ्चन से थोड़ी
बस,थोड़ी-सी
अन्दर ही अन्दर
नित क्षोभित
रहती है प्यारी जग की..
देश की हिन्दी..
मेरी हिन्दी..,
हमारी हिन्दी..,
सबकी हिन्दी...।
सादर सस्नेह
©डॉ.अमित कुमार दवे