दिखावे का अपनापन है, अपनेपन में दुनियादारी है,
मेरी मासूमियत,वो अल्हड़पन इस समझदारी ने ही मारी है.
यहां दौलत है, शौहरत है, कोई कमी तो नहीं है?
दो पल सुकून दे जाए जो, वो माँ की गोद नहीं है..
रास्ते-रास्ते मंजिलों तक का सफ़र,
पीछे छूटते मेरे गली, गांव, घर..
-Sarita Sharma