आज ना इस्तीफा देना का मन कर रहा है
खुद को खुद ही कि कैद से छुडवाने का मन कर रहा है ,
बहोत हो गई दिमाग की नौकरी ,
अब दिल के साथ जुड़ने का मन कर रहा है।
सोच समाजके चलने की बजाय
पागलपन करने का मन कर रहा है ,
दिमाग की जंजीरे तोड़ दिल के साथ धागे से बंधनेका मन कर रहा है ,
बस आज दिमाग को इस्तीफा देने का मन कर रहा है ।
- Nidhi Mehta