हर बार मेरे हिस्से की लिखावट मैं किताब में उतरता हूँ,,,,,,
तुझसे जुड़ी जिंदगी की कहानी को कलम से आबाद करता हूँ,,,,,
तू जान या ना जान में तेरे रूह से जोड़ कर इतिहास को जूठा कह सकता हूँ,,,,,
इश्क़ के पैमाने पर तेरी मजबूरियां को कातिल ए महोब्बत की गिनवा सकता हूँ,,,,!
DEAR ZINDAGI 💞