उम्मीद की पाती
तुम्हारे साथ रहकर
अक्सर मुझे लगा है
कि हम अमर्थताओं से नहीं
संभावनाओं से घीरे हैं ।
हर दीवार में द्वार बन सकता है
और हर द्वार से पूरा का पूरा पहाड़ गुजर सकता है
जीवन और मृत्यु के बीच जो भूमि है
वह नियति की नहीं मेरी है।
-- सर्वेश्वर दयाल शर्मा