तेरा दर्द दिलासा है !
तन्हाइयों ने मेरी जब तुझको तलाशा है ,
तेरा दर्द दिलासा है !
मैं चल रहा हूँ गिनता हुआ मीलोंके पत्थर,
पत्थर नहीं है इनपर लिखी है मेरी उमर ,
थके हुए से लम्हे नज़रों में निराशा है,
तेरा दर्द दिलासा है !
तू प्यास है की मेरी आँखों से बहता पानी !,
पानी पे तैरती है सदियोंसे ये कहानी ,
मिलता नहीं है मरहम यूँ जख्म जरा सा है,
तेरा दर्द दिलासा है !
.....धर्मेश मेहता (अमरेली, गुजरात)