शिकायत कर रहे हैं लोग, मेरे हर एक फसाने की
मेरे हर लब्ज मैं तुम हो, नही परवाह जमाने की
मेरि सुबह मेरि शामें, मेरि हर रात तुम से है
किसी से गुफ्त्गूँ क्या हो, मेरि हर बात तुमसे है
खुली आँखों से खवाबों मैं, बस एक दीदार है तेरा
कभी तो तुम भी मिल जाओ, खबर ले लो दीवाने की
-लव्जों की बरसात