"एक दीया और जलाना"
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दीया तो हर दिवाली जलाते हो
इस दिवाली क्या खास करोगे ??
तुम हर सांस में बसते हो जिनके
क्या उनका एहसास बनोगे ??
कहो, इस दिवाली क्या खास करोगे ??
अच्छा सुनो,
सुनो कि तुम इस दिवाली
तमाम जलते दीये के साथ
एक दीया और जलाना,
प्रेम और विश्वास लिए मन में
किसी की जीवन- ज्योत बन जाना.!
पूछना हौले से हाल उसका,
हाथों मे ले कर हाथ मुस्काना,
पास बैठना उसके तुम
और मुस्कुराहट की
वजह बन जाना !
इस बार,
तुम एक दीया और जलाना।
हाँ तुम जानते हो उसे,
हाँ, वो वही है,
जो हर रूप में तुम्हे दिखती है,
माँ, बहन, दोस्त, पत्नी बन
न जाने कई रिश्ते संग लिए
तुम्हारे साथ साथ चलती है!
लड़खड़ाए जो कहीं कदम उसके
तुम सहारा बन साथ खड़े हो जाना
डगमागाए जो कभी जीवन की नैया
साहिल बन उसको पार लगाना !
इस बार,
तुम एक दीया और जलाना। ।
उपेक्षित हो कर, अपमानित हो कर
सब बातें सबकी सहती है
इक आस की ज्योत जलाए दिल में
वो तुम्हारी तरफ ही तकती है,
तुम भी उसकी तरफ
विश्वास भरा एक हाथ बढ़ाना
बुझा हुआ है सालों से उसमें,
आत्मविश्वास की लौ जगाना!
इस बार,
तुम एक दीया और जलाना ।
जब पूजना तुम लक्ष्मी माँ को
अपनी लक्ष्मी को भूल न जाना,
करना रौशन उसकी दुनिया
मन का अँधेरा दूर भगाना !
इस बार,
तुम एक दीया और जलाना
तुम एक दीया और जलाना।