दोनो ने एक़दूसरे के हृदयकी आवाज़ सुन लीथीं। कुछ ना कह के उनमें प्रेम हो गया था। कभी कुछ ना कह के उनमें दूरी भी होती थी। कभी हल्की तकरार या कभी दोस्ती । पर उसने कुछ कहा नहीं और इसने भी कुछ कहा नहीं। बस इसीमें दोनो ख़ुश थे। एक दूसरेकी परवाह करते थे।
उसे दिखते थे, इसके शब्द । यें देखता रहता था, उसकी भावपूर्ण आँखे। इसकी कविता को, वो उसकी आँखो से जवाब देती थी। इसके नामसे उसका चेहरा खिलता था। पर उसने कुछ कहा नहीं और इसने भी कुछ कहा नहीं ।
वो है, इसलिए उसके शब्द निकलते है । वो सारे शब्द उसके लिए है। ये नहीं होती तो उसके शब्द नहीं होते। इसके पास जो शक्ति या ऊर्जा है। वो सिर्फ़ और सिर्फ़ उसके वजहसे है। इसकी लिखनेकी प्रेरना वोही है। वो अगर इसके जीवन में नहीं आइ होतीं, तो ना यह किसी का होता और ना तह कुछ लिखता । ये अगर नहीं होता तो वो भी किसी और की नहीं होती। हमेशा की तरह उसने कुछ कहा नहीं और इसने भी कुछ नहीं कहा ।
जब भी इसे ज़रूरत होती है, तो वो उसकेलिए दौड़ी आती। जब वो मुश्किल में होती है, तो यह उसकेलिए एक ढाल बनकर खड़ा होता है। उसके परेशानी की दवा हो जाता है । वो थोडीसी चंचल, तो यह शांत स्वभाव का। वो थोड़ी सी अल्लड, तो ये शरमीला । पर उसने कुछ कहा नहीं और इसने भी कुछ कहा नहीं।
कैसा है यह बंधन । कैसा है यह रिश्ता , जो प्यार से भी बढ़कर, जिसका कोई नाम नहीं है । पर दोनो ने इस रिश्ते को बहुत खूबी से सम्भाला है, खूबी से निभाया है। ना उसने कुछ कहा ना तो इसने कुछ कहा ।